ब्रितानी प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की 10 डाउनिंग स्ट्रीट की पारी को अभी जुम्मा-जुम्मा आठ दिन भी नहीं हुए थे कि उनके मंत्रिमंडल में धमाका हो गया। स्वास्थ्य मंत्री का अचानक इस्तीफा देना केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है। ये स्टार्मर के नेतृत्व पर सीधा हमला है। जब कोई कैबिनेट मंत्री ये कहकर कुर्सी छोड़ दे कि उसे अपने प्रधानमंत्री पर अब भरोसा नहीं रहा, तो समझ लीजिए कि सरकार की बुनियाद में दरारें काफी गहरी हैं।
ब्रिटेन की राजनीति को करीब से देखने वाले जानते हैं कि लेबर पार्टी की जीत जितनी बड़ी थी, उसके अंदर का विरोधाभास उतना ही तीखा है। स्वास्थ्य मंत्री का जाना इस बात की तस्दीक करता है कि 'चेंज' का जो नारा देकर स्टार्मर सत्ता में आए थे, वो खुद उनकी अपनी टीम को रास नहीं आ रहा। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये सिर्फ एक शुरुआत है?
स्टार्मर की लीडरशिप पर उठते गंभीर सवाल
स्वास्थ्य मंत्री का इस्तीफा उस वक्त आया है जब ब्रिटेन का नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) वेंटिलेटर पर है। वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है और डॉक्टर्स की हड़ताल ने सिस्टम की कमर तोड़ दी है। ऐसे में विभाग के मुखिया का साथ छोड़ना ये बताता है कि बंद कमरों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। इस्तीफे की चिट्ठी में जो शब्द इस्तेमाल हुए, वो चुभने वाले हैं। "भरोसा नहीं रहा" (No longer trust) जैसे जुमले किसी भी नेता के लिए राजनीतिक सुसाइड नोट की तरह होते हैं।
स्टार्मर पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वो जरूरत से ज्यादा सावधानी बरतते हैं। उनके फैसलों में वो धार नहीं दिखती जिसकी उम्मीद एक नई सरकार से की जाती है। स्वास्थ्य मंत्री को शायद ये महसूस हुआ कि स्टार्मर के पास NHS को संकट से निकालने का कोई ठोस प्लान नहीं है, सिर्फ खोखले वादे हैं। राजनीति में परसेप्शन ही सब कुछ है। आज की तारीख में परसेप्शन ये है कि स्टार्मर अपनी टीम को एकजुट रखने में नाकाम हो रहे हैं।
लेबर पार्टी के अंदर सुलगती आग
इस इस्तीफे को सिर्फ एक व्यक्ति की नाराजगी मत समझिए। ये लेबर पार्टी के भीतर चल रहे वैचारिक युद्ध का हिस्सा है। पार्टी का एक धड़ा चाहता है कि सरकार फौरन आक्रामक सुधार लागू करे। दूसरा धड़ा, जिसमें खुद स्टार्मर शामिल हैं, फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहता है। स्वास्थ्य मंत्री का जाना दिखाता है कि पार्टी का वामपंथी और उदारवादी खेमा एक मंच पर नहीं है।
ब्रिटेन की जनता ने टोरी शासन के 14 सालों के बाद लेबर को इसलिए चुना था क्योंकि उन्हें स्थिरता चाहिए थी। लेकिन अगर सरकार के शुरुआती महीनों में ही इस तरह के हाई-प्रोफाइल इस्तीफे होंगे, तो जनता का मोहभंग होने में देर नहीं लगेगी। क्या स्टार्मर ने अपनी कैबिनेट चुनते समय वफादारी को योग्यता पर तरजीह दी? या फिर वो अपने मंत्रियों को वो आजादी नहीं दे रहे जो एक बड़े विभाग को चलाने के लिए जरूरी है?
क्या एनएचएस का संकट ही असली वजह है
ब्रिटेन में स्वास्थ्य सेवा कोई मामूली मुद्दा नहीं है। ये भावनाओं से जुड़ा विषय है। स्वास्थ्य मंत्री का पद कांटों भरा ताज है। रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इस पद पर रहने वाले लोग सबसे ज्यादा दबाव में रहे हैं। लेकिन इस्तीफा देने का समय और लहजा बहुत कुछ कहता है।
अगर स्वास्थ्य मंत्री को लग रहा था कि बजट आवंटन में उनके विभाग की अनदेखी हो रही है, तो ये सीधे तौर पर चांसलर और प्रधानमंत्री की विफलता है। फंड की कमी और बढ़ती मांग के बीच तालमेल बिठाना नामुमकिन होता जा रहा है। जब समाधान नहीं दिखता, तो भाग जाना ही एकमात्र रास्ता बचता है। इस इस्तीफे ने विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा दे दिया है। ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी, जो अभी अपनी हार के सदमे से उबर रही है, इसे स्टार्मर की "कमजोर पकड़" के तौर पर पेश करेगी।
जनता पर इसका क्या असर होगा
आम आदमी को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि कौन मंत्री आ रहा है और कौन जा रहा है। उसे फर्क पड़ता है कि उसे डॉक्टर का अपॉइंटमेंट कब मिल रहा है। लेकिन जब नेतृत्व ही अस्थिर हो, तो पॉलिसी मेकिंग ठप हो जाती है। अधिकारी नए मंत्री के आने का इंतजार करते हैं और फाइलें दबी रह जाती हैं। ब्रिटेन की जनता पहले ही महंगाई और टैक्स के बोझ तले दबी है। राजनीति का ये ड्रामा उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
आने वाले दिनों में क्या होगा
कीर स्टार्मर को अब डैमेज कंट्रोल मोड में आना होगा। उन्हें ये साबित करना होगा कि उनकी सरकार अभी भी पटरी पर है। एक नया स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त करना आसान है, लेकिन उस भरोसे को बहाल करना मुश्किल है जो इस इस्तीफे के साथ टूट गया है। अगर आने वाले हफ्तों में एक-दो और इस्तीफे हुए, तो स्टार्मर की कुर्सी पर खतरे के बादल मंडराने लगेंगे।
लंदन की गलियों में चर्चा है कि ये तो सिर्फ ट्रेलर है। असली फिल्म अभी बाकी है। स्टार्मर को अपनी कार्यशैली बदलनी होगी। उन्हें अपने मंत्रियों के साथ संवाद बढ़ाना होगा और उन्हें ये यकीन दिलाना होगा कि वो सच में बदलाव लाना चाहते हैं, सिर्फ कुर्सी बचाने के लिए समझौता नहीं कर रहे।
ब्रिटेन की राजनीति में ये हफ्ता एक टर्निंग पॉइंट की तरह याद रखा जाएगा। स्टार्मर के लिए हनीमून पीरियड आधिकारिक तौर पर खत्म हो चुका है। अब उन्हें असली राजनीति का सामना करना है, जहां अपने ही लोग सबसे बड़े दुश्मन बन जाते हैं। इस संकट से उबरने के लिए उन्हें सिर्फ कड़े फैसले नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने वाली सोच दिखानी होगी। अगर वो ऐसा नहीं कर पाए, तो लेबर पार्टी की ये ऐतिहासिक जीत बहुत जल्द एक ऐतिहासिक नाकामी में बदल सकती है।
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि डाउनिंग स्ट्रीट से अगला बयान क्या आता है और क्या विपक्ष इस मौके का फायदा उठाकर सरकार की घेराबंदी तेज करता है। राजनीति में खामोशी अक्सर बड़े तूफान का संकेत होती है।